‘पेन्सनके लेल सेहो विदेशी अनुदान माँगएके अवस्था आबि रहल अछि’

काठमाण्डु अगहन १७ गते ।संघीय मामिला तथा सामन्य प्रशासन मन्त्री हृदयेश त्रिपाठी निजामति सेवा ऐनमे विचार नहि पहुँचाओलगेल तऽ आगामी १८ वर्षके बाद कर्मचारीकेँ पेन्सन देबएलेल सेहो विदेशी अनुदान माँगएके अवस्था आओत बतओलन्हि अछि ।
एखनुक अवस्था, चुनौती आ संविधानकेँ ध्यानमे राखि कऽ निजामति सेवा ऐन नहि आनलगेल तऽ सरकारके पेन्सन देबएलेल सेहो विदेशी अनुदान माँगएके दिन आओत ओ बतओलन्हि ।
सोमदिन संघीय संसदके राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समितिमे मन्त्री त्रिपाठी कर्मचारीक समायोजनमे देखलगेल त्रुटिकेँ सेहो सुधार करए परत बतओलन्हि ।
ओ कर्मचारीके मूल्यांकन करबाक क्रममे महालेखापरीक्षकके कार्यालयक प्रतिवेदनमे उल्लेख कएलगेल विषयकेँ सेहो देखबाक व्यवस्था करब जरुरी रहल बतओलन्हि । ओ काम करएबला व्यक्ति आ नहि करएबलाकेँ समान व्यवहार नहि करबाक चाही कहैत सकारत्मक विभेदके हिसाबसँ विधेयक लएबाक आवश्यक्ता रहल बतओलन्हि ।
तहिना विधेयकमे व्यक्तिकेँ दण्डित करबालेल बदली करबाक पद्धतिसँ आयोजना या संस्था दण्डित हएबाक अवस्था आबि सकैत अछि कहैत ओहिकेँ कम करबालेल सेहो विधेयकमे समावेश करबाक ओ धारणा रखलन्हि ।
विमर्शमे मन्त्री त्रिपाठी विधेयकमे समिति एहिसँ पहिने जुटओने सहमतिमे संसद आ सर्वोच्च अदालतक आदेशक ध्यान राखलगेल बतओलन्हि । ओ सभदिन एकहिटा सरकार रहत एहि भावनासँ विधेयक लओलासँ नयाँ सरकार अओलाक बाद संशोधन हएबाक अवस्था आबि सकैत अछि उल्लेख करैत कोनो ऐन, विधेयककेँ प्रयोग करबाक स्थितिमे नहि लएबाक चाही बतओलन्हि ।
मन्त्री त्रिपाठी कर्मचारीक उमेर हद कहियो ५८ आ कहियो ६० बनाओलगेलाक कारण विधेयक बेरबेर संशोधन भेलासँ संसदके प्रभावकारिता उपर प्रश्न उठत कहैत गहन चर्चा करबाक आवश्यक्ता रहल सेहो बतओलन्हि ।

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