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एहि बजेटसँ समृद्धि असंभवः अर्थविद्

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जनकपुरधाम अखार ३ गते ।प्रदेश सरकार ३८ अबए ७२ करोड ५६ लाख ६१ हजारक बजेट प्रस्तुत कएने अछि । प्रदेश सरकारक आर्थिक मामिला तथा विकासमन्त्री विजय यादव रविदिन प्रदेशसभा बैठकमे आगमी आर्थिक वर्षके लेल बजेट प्रस्तुत करैत कुल बजेटमेसँ ४९.८१ प्रतिशत चालु तथा ५०.१९ प्रतिशत पूँजीगततर्फ विनियोजन कएलगेल जानकारी देलन्हि ।
बजेट प्रस्तुत करैत अर्थमन्त्री यादव कृषि, गरिबी, शिक्षा, पर्यटन, उद्योग, स्वास्थ्यसहितक विषयकेँ प्राथमिकता देलगेल दावा कएलन्हि । निर्वाचन क्षेत्रक विकासके लेल प्रत्येक निर्वाचित सांसदकेँ ३÷३ करोड रुपैयाँ विनियोजन कएलगेल ओ जानकारी करओलन्हि । सांसदसभकेँ अलगसँ ३÷३ करोड रुपैयाँ विनियोजन करबाक निर्णयके जनस्तरसँ व्यापक आलोचना सेहो भऽ रहल अछि ।
अर्थमन्त्री यादवसहित सत्ताधारी दलक सांसदसभ बजेटके प्रशंसा कऽ रहलाक बादो अर्थविद्सभ बजेट सन्तोषजनक नहि रहल टिप्पणी कएलन्हि अछि । सरकार कहि रहलजँका प्रदेशकेँ समृद्ध बनएबाक हिसाबसँ कोनो विशेष कार्यक्रम बजेटमे समावेश नहि कएलगेल अर्थविद्सभक कहब अछि ।
प्रदेशक अर्थमन्त्री यादव बजेट प्रस्तुत कऽ रहल समय विगतके पञ्चायती शैलीसँ अधिक अन्तर नहि देखलगेल अर्थविद् प्राध्यापक डा.सुरेन्द्र लाभ टिप्पणी कएलन्हि अछि ।
‘मन्त्रीजी बजेट पढि रहल समय पुराने पञ्चायती शैलीजँका अनुभव भऽ रहल छल, संघीय सरकारक अर्थमन्त्रीक सेहो ओहने शैली देखलगेल । प्रदेश बजेटमे कोनो किसिमक नयाँपन नहि देखलगेल,’ लाभ बतओलन्हि । संघीयताअनुसार केन्द्र आ प्रदेश दुनु बजेट नहि आबि सकल हुनकर कहब अछि ।
‘संघीयता कार्यान्वयन भऽ चुकल अवस्थामे स्थानीय तहकेँ कोना मजबुत बनाओल जाए ई जिम्मेवारी प्रदेश सरकार पर अछि,’ प्राध्यापक लाभ कहलन्हि,‘मुदा प्रदेश सरकार पालिकासभकेँ मजबुत बनएबाक हिसाबसँ योजना लओने बजेटमे नहि देखलगेल अछि ।’ पहिल बजेटमे त्रुटि रहलाक बादो एहिबेरके बजेट सुधार कऽ कऽ अएबाक चाही छल कहैत ओ कहलन्हि,‘मुदा कोनो नयाँपन नहि देखलासँ बजेटसँ हम निराश छी ।’
प्रदेशके समृद्ध बनएबाक नारा सरकार दऽ रहलाक बादो बजेटमे ओहन किछु नहि देखलगेल ओ बतओलन्हि । ‘प्रदेशकेँ समृद्ध बनएबाक कार्यक्रम अएबाक चाही छल, रकम विनियोजन हएबाक चाही छल,’ लाभ कहलन्हि,‘भाषण कएलासँमात्र समृद्धि नहि अबैत अछि, एहिके लेल योजना आ पैसा चाहैत अछि । ई दुनु चिज बजेटमे नहि देखलगेल अछि ।’
अर्थमन्त्रीजी समाजवादी पार्टीसँ आवद्ध छथि कहैत ओ ‘नहि तऽ बजेट गरीब अनुकूल भऽ सकल अछि, नहि समाजवादीए देखलगेल अछि ।दलितकेँ सम्बोधन करबाक हिसाबसँ ठोस कार्यक्रम नहि आबि सकल अछि, बहुतबेसी नियमित बजेट आएल अछि ।’ खानापूर्ति करबालेल आएल बजेटसँ प्रदेशक स्वरुप परिवर्तन हएबाक सम्भावना कम देखलगेल ओ बतओलन्हि ।
एम्हर दोसर अर्थविद् भोगेन्द्र झा बजेटमे त्रुटि रहलाक बादो विगतके वर्षसँ परिस्कृत रहल टिप्पणी कएलन्हि अछि । पछिला बजेटमे किछु नहि रहलाक बादो एहिबेर सरकार बजेटमे सैद्धान्तिक अवधारणा आ व्यवाहारिक सन्तुलनक प्रयास कएने झा बतबैत छथि । बहुतरास विषयवस्तु छुटलाक बादो पछिला बजेटके तुलनार्म ई बजेट अग्रगामी रहल झाक कहब छलन्हि ।
संघीयताक स्वरुप आ प्रादेशीक संरचनाक आकांक्षाकेँ सम्बोधन करबालेल किछु योजनासभ आएब बजेटके निक पक्ष रहल कहैत प्राध्यापक झा कहलन्हि,‘निर्वाचन क्षेत्रकेँ प्राथमिकता देलगेल अछि, प्रादेशीक पहिचान प्रमुखताम राखलगेल । एहि विषयवस्तु बजेटके सकारात्मक पक्ष लागि रहल अछि ।’
यद्यपि निर्वाचन क्षेत्र विकासके लेल प्रदेशसभा सदस्यसभकेँ पैसा वितरण करएबला कार्य बजेटके नकारात्मक पक्ष रहल ओ बतओलन्हि । एहि प्रकारक कार्यक्रमसभमे उदहारण बनबाक चाही छल,‘एहिमे सत्ता आ प्रतिपक्ष दुनु दोषी देखलगेल अछि,’ झा बतओलन्हि । प्रदेश ४ आ प्रदेश ५ हटाचुकल ई व्यवस्था कायम राखि कऽ नेतासभ मानसिक दरिद्रताक प्रदर्शन कएने हुनकर कहब छलन्हि ।
बजेट लएबाक काज भेलाक बादो कार्यान्वयन प्रमुख चुनौती रहल एहि विषये अर्थविद् लाभ आ झाक विश्लेषण समान अछि । पछिला वर्ष संसदसँ बजेट तथा कार्यक्रमसभ पारित भेलाक बादो सामाजिक विकासमन्त्री पैघ रकम रकमान्तरण कऽ अपने बेटा मेयर रहल नगरपालिकामे लऽ जाएब दुर्भाग्यपूर्ण छल ओसभ बतबैत छथि । बजेट अएबासँ अधिक कार्यान्वयन प्रमुख रहल कहैत विगत वर्ष भेल त्रुटिसभकेँ रोकबालेल अर्थमन्त्रीकेँ कडाइके साथ प्रस्तुत हएबाक आवश्यक्ता रहल ओसभ बतओलन्हि ।

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