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प्रचण्ड आ ईश्वर पोखरेलबीच घोचपेच

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काठमाण्डु जेठ २ गते ।पार्टी एकीकरणक एक वर्ष पहुँचल समय सत्तारुढ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) मे वैचारिक ध्रुविकरणक संकेत देखलगेल अछि । विगत लम्बा समयसँ सुसुप्त अवस्थामे रहल वैचारिक बहस बुधदिन युवा संघक स्थापना दिवसमे कार्यकर्तासभकेँ बुझबाक हिसाबसँ बाहर आएल अछि । अध्यक्षमेसँ एक पुष्पकमल दहाल प्रचण्ड आ सचिवालय सदस्य ईश्वर पोखरेल एकहि मञ्चसँ फायर खोलने छथि ।तत्कालीन नेकपा एमाले आ माओवादी केन्द्रबीच एकीकरण भेल समय एमालेक जनताक बहुदलीय जनवाद आ माओवादीक माओवाद स्थगित कऽ जनताक जनवाद मानल जाएत कहलगेल छल । यद्यपि जनताक जनवादक विषयमे विवाद कायमे अछि ।
युवा संघक स्थापना दिवसके अवसर पर प्रचण्डसँ पहिने सम्बोधन कएने पोखरेल स्पष्ट वैचारिक कार्यदिशा नहि रहल कम्युनिस्ट पार्टी तासके पत्ता जँका ढहि जाएत चेतावनी देलन्हि । नेकपामे एअन प्रष्ट राजनीतिक आ वैचारिक कार्यदिशा नहि रहल कहैत आब ओहि विषयमे पाटीभितर छलफल करबा पर ओ जोड देने छलथि ।
पार्टी एकीकरणे बेरसँ तत्कालीन एमाले अनुसरण करैत आएल जनताक बहुदलीय जनवादे नेकपाक मार्गदर्शक सिद्धान्त हएबाक चाही विगत किछु दिनसँ पोखरेल विभित्र स्थानमे बतबैत आबि रहल छथि ।पोखरेल एहन विचार रखलासँ आ तत्कालीन माओवादी लेने नीतिके आलोचना कएलासँ नेकपाभितर पूर्वमाओवादी पंक्तिबीच स्वीकार्य नहि भऽ सकल अछि ।
पार्टीभितर अध्यक्ष केपी शर्मा ओलीकेँ साथ दैत आएल पोखरेल बुधदिन प्रचण्ड, माधव नेपाल, झलनाथ खनाल आ विष्णु पौडेलसहितक नेतासभक सामने वैचारिक बहसके शुरुवात हएबा चाही धारणा रखलाक बाद कार्यकर्ता पंक्तिमे तरंग उत्पत्र भेल ।
पोखरेलक बाद सम्बोधन कएने झलनाथ खनाल आ माधव नेपाल विचार तथा सिद्धान्तक विषयमे बहस तऽ नहि कएलन्हि मुदा प्रचण्ड पोखरेल उपर कटाक्ष कएलन्हि । प्रचण्ड अपन सम्बोधनक क्रममे किछु आक्रोशित रुपेँ प्रस्तुत होइत पुरान विचार दोहरा कऽ कम्युनिस्ट पार्टी नहि बनत बतओलन्हि ।
ओ गीता, बाइबल आ कुरानजँका धर्मशास्त्र माकर््सवाद नहि अछि कहैत विचार सिद्धान्तमे निरन्तर प्रयोग आ विकास होइत गेलाक कारण छोडि चुकल विचार सिद्धान्तप्रति मोह त्यागएलेल सुझाव देलन्हि ।
पोखरेलतर्फ इंगित करैत ओ कहलन्हि,‘सही विचार सभदिनके लेल किछु नहि रहैत अछि । निरन्तर बहस आ अन्तरक्रियासँ नयाँ विचार बनैत अछि ।एकहिटा विचार सही अछि कहने रहैतौंह तऽ एतह धरि नहि पहुँचल जा सकैत छल । की युद्धमे जीत होइत या मरि कऽ समाप्त । शान्ति कहएबलासभ सेहो शान्तिएम समाप्त भऽ जएतैक । आई प्रधानमन्त्री मन्त्री बनि कऽ समृद्ध नेपाल सुखी नेपालीक सपना बाँटएबला स्थानमे नहि अबितौंह ।’
प्रचण्ड विचारक शुद्धताक नाममे जनता आ राष्ट्रक आवश्यक्ताकेँ नजरअन्दाज करएबला आ वैचारिक शुद्धताक नाममे पार्टीकेँ विभाजनतर्फ लऽ जाएबला जडि प्रवृत्ति भोगैत आएल बतओलन्हि । ओ कोनो विचार सभदिनके लेल सही नहि भऽ सकैत अछि कहैत अप्रत्यक्ष रुपेँ पूर्वएमाले पंक्तिक जनताकेँ बहुदलीय जनवादक मोह त्यागएलेल आग्रह कएलन्हि ।
प्रचण्ड आ पोखरेलबीचक वैचारिक बहस ओहि समय सतहमे आएल अछि, जखन नेकपाक संगठन एकीकरण करिब करिब सम्पत्र हएबाक चरणमे अछि ।

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