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कञ्चनवनमे परिक्रमाके होली

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जनकपुरधाम फागुन ३० गते ।मिथिलाक बहुचर्चित माध्यमा परिक्रमा बुधदिन महोत्तरीक कञ्चनवनमे रंङ अबिरकसँग होरी मनओलक अछि । त्रेता युगमे भगवान राम एतह होरी खेलने मान्यताके सँग परिक्रमामे सहभागीसभ एकदोसरके रंङ आ अबिर लगा कऽ होरी खेलल करैत छथि ।
ध्रुवकुण्डसँ कञ्चनवन पहुँचल साधु, सन्त, महन्थ, नागा सहित परिक्रमामे सहभागी तिर्थालुसभक चेहरा आ कपडा रंङसँ रंगायल छल । वसन्तपञ्चमीएसँ होलीके शुरुवात मानलगेलाक बादो मिथिलाञ्चलमे कञ्चनवनमे होरी खेललाक बाद औपचारिक रुपसँ शुरुवात होइत अछि । धनुषाक कचुरीमठसँ मिथिला बिहारी कुटीसँ मिथिला बिहारी तथा जनकपुरक अग्नी कुण्डसँ किशोरीजीक डोलाके साथ हुनमानगढीसँ विधिवत शुरु भेल परिक्रमाक तिर्थालु कल्याणेश्वर, फुलहर, मठिहानी, जलेश्वर, मडई, ध्रुवकुण्ड होइत कञ्चनवन पहुँचल अछि । मिथिला महात्मय अनुसार १८ अम शताब्दीसँ माध्यमा परिक्रमाके रुपमा मनाओल जा रहल एहि धार्मिक यात्राक सहभागीसभ १५ दिन रात्री भजन किर्तन कऽ १५ दिन बिताओल करैत अछि । विश्वक सभसँ लम्बा धार्मिक यात्रा कञ्चनवनके बाद धनुषाक पर्वता, धनुषाधाम, सतोखर, औरहीमे एक–एक राति विश्राम कऽ पूर्णिमासँ एकदिन पहिने जनकपुर पहुँचैत अछि । पूर्णीमाक दिन जनकपुरक अन्तगृह परिक्रमा कऽ १५ दिनक मिथिला मध्यमा परिक्रमा समापन होइत अछि । नेपाल भारत दुनु देशक धार्मिक साँस्कृतिक एवम पारम्परिक सदभावक प्रतिक बनल परिक्रमा यात्रामे नेपालक १२ तथा भारतक ३ स्थानमे विश्राम स्थल अछि । मिथिला महात्ममे एहि विश्राम स्थलके पौराणिक एवम धार्मिक महत्वके विषयमे अलग अलग व्यख्यान कएलगेलाक कारण भक्तजनसभमे अटुट आस्था रहल अछि । मिथिला महात्म अनुसार १८ अम शताब्दीसँ एहि धर्म यात्राकेँ माध्यमिकी परिक्रमाके रुपमे मनाओल जा रहल अछि । सभसँ लम्बा दुरीके एहि धार्मिक यात्रामे नेपालमे १०७ आ भारतमे २६ कऽ कऽ कुल १३३ किलोमिटर भूमिके पैदल यात्रा तय कएल जाति अछि । परिक्रमामे भारतक अयोध्या, मथुरा, हरिद्धार, दरभंगा, सीमाढी, बैधनाथधाम सहितक स्थानक साधुसंतसभक उल्लेख्य रुपमे सहभागीता अछि ।

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