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‘ठोक्कर आ अग्निपरीक्षासँ नेता जन्म लैत अछि ः प्रचण्ड

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काठमाण्डू पुस २९ गते ।नेपाल कम्युनिष्ट पार्टीक अध्यक्ष तथा पूर्वप्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ ठक्कर आ अग्निपरीक्षासँ नेता जन्म लैत अछि बतओलन्हि अछि । शनिदिन उपन्यासकार भगवती ढुङ्गेलके पुस्तक बिमोचन करैत प्रचण्ड ई बात बतओलन्हि अछि । उपन्यास बिमोचन करैत प्रचण्ड कहलन्हि, ‘पार्टी आ नेता जनता तैयार करत । जनता बहुत ठोक्कर देला बाद, अग्निपरीक्षामे राखि कऽ नेता जन्म लैत अछि’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘नेता जीवन आ जनताके विभिन्न उतारचढाव भोगैत अछि । ओ अपने भितरसँ आ आओर अपनेमेसँ नेता बनबैत अछि, साहित्यकार आ राजनीतिज्ञ सेहो ओहिना जन्म लैत छथि ।’
राजनीतिमे लागएबलासभ अनुभूतिके पक्षसँ अपन जीवनके प्रारम्भ करैत अछि । कोनो नेता जनताके अनुभूतिके तहसँ ओसभ भावनाके तहसँ बुझए नहि सकल तऽ ओहिसँ समाज रुपान्तरणके नेतृत्व करब सम्भव नहि होइत अछि । ‘निरास प्रवृत्ति राजनीतिक आन्दोलनके नेतृत्व नहि काएल जा सकैत अछि’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘राजनीति सभ पक्षक समग्र नेतृत्व करैत अछि । साहित्य भावनात्मक दृष्टिसँ राजनीतिक आन्दोलनमे सहयोग करैत अछि । साहित्य आ राजनीति समाज रुपान्तरणके लेल अलग धारसँ सँगहि रहत ।’
‘जनताके सभ भावनात्मक पक्षकेँ समेट कऽ मात्र ओहिकेँ कलात्मक अभिव्यक्ति दऽ कऽ मात्र साहित्य जीवन्त होएत’ ओ कहलन्हि, ‘युवा उपन्यासकार भगवती ढुङ्गल सेहो पितृसत्ताके विभिन्न पक्ष उपन्यासमे उल्लेख कएलन्हि अछि । उपन्यास पुरुषके आधिपात्य, दम्भ आ अहङ्कार महिलाकेँ कोना कऽ प्रताडित करत कहि विम्ब बाजल अछि ।’
‘एखन महिला स्वतन्त्रताके चरणमे अछि । हुनकासभकेँ अपना उपर भेल यातना, प्रताडना विरुद्ध लड्ए तैयार अछि’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘विग फाइभमेसँ विग थ्री’ महिला ओहिना नहि भेल अछि, एहिमे राजनीतिक आन्दोलनके पैघ योगदान अछि । राज्यके सभ तहमे महिलासभ मजबुत प्रतिनिधित्व कऽ रहल अछि । सङ्घीय, प्रादेशिक आ स्थानीय तहमे महिलाके महत्वपूर्ण सहभागिता अछि ।’
पार्टीसभ अपन कमिटीमे ३३५ महिला सहभागी बनाबहि परत’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘हमरासभक पार्टी एखन अवैधजँका भऽ गेल अछि । हमसभ निर्वाचन आयोगमे हमसभ ३३ प्रतिशत पहुँचाएब कहने छी । हमसभ आगामी अधिवेशनसँ ३३५ प्रतिनिधित्व पहुँचाएब । एहिसँ व्यवहारिक रुपेँ महिलासभकेँ शक्तिशाली आ समान बनाओल जाएत ।’ शिक्षा, स्वास्थ्य आ रोजगारी प्रत्येक नागरिकके मौलिक हक रहल प्रचण्ड बतओलन्हि । ओ कहलन्हि, ‘शिक्षा, स्वास्थ्य आ रोजगारीकेँ संविधानमे मौलिक हकके रुपेँ राखलगेल छल । मुदा, आसिन ३ गते बाद ओ सभ कानूनमे बदलल अछि । आब केऊ अदालतमे मुद्धा कएलक तऽ राज्य हारत, राज्य नागरिककेँ क्षतिपूर्ति तिरए पडत ।’
‘संविधानमे पैघ पैघ बात लिखलगेल अछि । मुदा एहिकेँ जीवन व्यवहारमे बदलए किछु फरक अछि’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘ई सहज बात रहत इ हमरासभक सोंच आ आचरणमे सेहो निर्भर करत । संविधानमे लिखलेपर जनताके चेतनाके तह मजबुत नहि भेल तऽ ओ लागु नहि होएत । संविधानकेँ साेंचमे बदललगेल तऽ संविधान कागजके टुक्रा बनत ।’
‘साहित्य जनताकेँ भितरसँ भितरसँ उद्देलित करत । राजनीति आवेगात्मक आ क्षणिक होएत, साहित्य भावनात्मक आ दीर्घकालीन होएत’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘भावात्मक चेतना मजबुत कऽ पकराएल अछि तऽ ओ साहित्य जीवन्त होएत । एखनुक बहुत साहित्यकारसभ समाज रुपान्तरणके पक्षमे जीवन्त साहित्य रचना करए लागल अछि, ई खुसीके बात अछि ।’
‘कला कलाके लेल कहएबलासभक सेहो उद्देश्य अछि । ओसभ सम्भ्रान्त वर्गक सेवा करत’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘ओहिसँ उद्देश्यबिहीनता आ लक्ष्यबिहीनतादिस लऽ जाएत । वहए हुनकासभक उद्देश्य अछि । अज्ञानता कहियो जनताके सेवा नहि करैत अछि । ज्ञानके चेतना, ज्ञानके ज्योतिबिना जनताके सेवा नहि कएल जा सकैत अछि । उन्नत चेतनासँ मात्र जनताके सेवा करए आ जनताकेँ समृद्ध बनाओल जा सकैत अछि ।’
‘आदमीसभकेँ पाछासँ धकेल कऽ डोर्याउल नहि जा सकैत अछि । आगुएसँ नेतृत्व आ अगुवाई करए पडत’ प्रचण्ड कहलन्हि, ‘हमसभ शिक्षा आ स्वास्थ्यके प्रवन्धसहित रोजगारीके वातावरण सिर्जन कएलगेल तऽ आबके दश वर्षमे बहुत परिवर्तन कएल जा सकैत अछि । हम सेहो आबके बाँकी जीवन ओहिके लेल खर्च करबाक संकल्प कएने छी ।’

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