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आई दियावाती श्रद्धापूर्वक मनाओल जा रहल

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जनकपुरधाम २१ गते । धनक देवी भगवती लक्ष्मीके लक्ष्मीके पूजा आई घरघरमे मनाओल जा रहल अछि । दिप नहि बरल घरमे लक्ष्मीके बास नहि होइत अछि पुरान कहब अनुसार घरक चारुतर्फ सरसफाई कऽ घर आँगन, केबारी, खिरकी सहितक स्थानमे दिप बारि कऽ लक्ष्मीके स्वागत कएलगेल अछि । लक्ष्मी पूजाक रातिके सुखरात्री सेहो कहल जाति अछि । साँझके समय गृहणीसभ लक्ष्मीक मुर्तीमे पूजा कएल करैत छथि । १४ वर्षक वनवास काटि कऽ अयोध्या घुरल खुशीमे अयोध्यावासी दियावाती मनओने रहैक ओहि जनविश्वासके साथ दियावाती मनाबक परम्परा सेहो अछि ।
दियावातीक अवसर पर जनकपुरक व्यापारीसभ अपन अपन दोकानके विशेष रुपसँ सजओने छथि । दोकान सरसफाई कऽ कऽ व्यापारीसभ अपन दोकानके भव्य रुपेँ सजनओने छथि । जनकपुरक मुख्य बजारसभमे व्यापारीसभ अपन अपन दोकानक आगा विभिन्न प्रकारक सर–सजावट कएने छथि । यद्यपी एहि वर्ष सडक निर्माणक कारण जनक चौक–जानकी मन्दिर–महावीर चौक जाएबला रास्तामे रहल दोकानसभ प्रभावित भेल अछि । ओहि क्षेत्रक सडक निर्माणमे ढिलाई भेलाक कारण दिपावलीक रौनकतामा हस आएल अछि ।
लोप भऽ रहल हुकालोली
मिथिलाञ्चलक अति प्राचिन परम्परा हुक्कालोली लोप हएबाक कगार पर पहुँच गेल अछि । दियावातीमे बढि रहल आधुनिकताके सँग हुकालोली लोप होइत जा रहल अछि । धार्मिक ग्रन्थ स्कन्द पुराण अनुसार पितृकेँ बाट देखाबएलेल उल्का भ्रमण अर्थात हुक्कालोली भाँजल जाति अछि ।
हुक्कालोली भँजलाक बाद जोतल खेतमे दक्षिणतर्फ घुमि कऽ विसर्जन करबाक परम्परा अछि । साँस्कृति विदसभक अनुसार युवासभ फटक्का तथा फुलझरी सहितक साधनतर्फ आकर्षित होबएलगलाक कारणेँ मिथिलाक पुरान परम्परा लोप भऽ रहल छैक । आधुनिकताके पाछा युवासभ अपन पुरान सँस्कृति बिसइर रहल कहैत सँस्कृतिविद् एहिके बँचाबए पर जोड देलन्हि । हुनकासभक अनुसार कोनो कारणवस मृत आत्मा भेटगेला पर हुक्कालोली मार्फत बाट देखाबक परम्परा छैक ।

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